Narendra Singh(The Steel Man)

लाडनूं के लाल नरेंद्र सिंह(स्टील मेन)बम बारूदों को डिफ्यूज करने में थे एक्सपर्ट|

एन्टी नक्सली सर्चिग ऑपरेशन के दौरान ग्रेनेड फटने से हुए थे शहीद

लाडनूं-उपखंड के ग्राम बादेड के शेर दिल इंसान नरेंद्र सिंह जिनके सामने नक्सलियों के बम बारूद भी बेदम हो जाते थे। इनके पिता का नाम अर्जुन राम मेहरिया व माता का नाम अमरी देवी था।

नरेंद्र सिंह का जन्म 2 जनवरी 1968 में हुआ व शिक्षा प्राप्त कर 21 नवंबर 1987 को भारतीय सेना जॉइन की जिसमे 18 वर्ष 7 महीने 10 दिन सेवा कर 30 जून 2006 को स्वेच्छा से सेवानिवृत्त होकर देश सेवा के जज्बे के चलते पुनः 25 जलाई 2006 में छतीसगढ़ पुलिस में सब इंस्पेक्टर के रूप में तैनात हुए।भारतीय सेना में घातक कमांडर के रूप में रहते हुए इन्होंने श्रीलंका,भूटान,सियाचिन,जम्मू कश्मीर,आसाम,अरुणाचल,करगिल में अपनी सेवाएं दी व विभिन्न सम्मान प्राप्त किए। बम डिफ्यूज तो इनके लिए रोमांच का कार्य था। सूचना मिलते ही बारूदी सुरंगे,टिफिन बम,ग्रेनेड आदि को निष्क्रिय करने मौके पर मिलते। अपने इन्ही कार्यो की बदोलत यह स्टील मेन कर नाम से विख्यात थे।

कांकेर क्षेत्र में एंटी नक्सली सर्च ऑपरेशन के दौरान ग्रेनेड फट जाने से लाडनूं का यह लाल मातृभूमि की सेवा करते हुए 11मई 2016 को शहीद हो गया। गुरिल्ला युद्ध,शार्प शूटिंग, अंतराष्ट्रीय सेमिनार, ब्लेक कमांडो,आदि में विशेषज्ञ की भांति पलक झपकते ही सैंकड़ो किलो के बम बारूद को नष्ट कर देते थे। इनके भाई ज्ञानाराम मेहरिया ने बताया कि यह लाडनूं में एनसीसी चीफ ऑफिसर मदनलाल आर्य से प्रेरित थे व उनके शिष्य थे वर्तमान में इनके एक पुत्र विक्रम पुत्री परीता व पत्नी रुक्मणि परिवार में है। राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार के बाद गांव में इनके फार्म हाउस पर पेड़ पौधों के बीच मे प्रतिमा स्थापित की गयी है। अक्सर अपने साथियों को कहते थे कि में दुश्मनों की साज़िश कभी सफल नही होने दूँगा और इसी प्रकार वीआईपी स्थल से लेकर पहाड़ी रण क्षेत्रों में 256 से अधिक बम डिफ्यूज करने वाले नरेंद्र अचानक ग्रेनेड विस्फोट से वीरगति हो गए।

Narendra Singh(The Steel Man)

Bomb Squad Team Member

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